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    प्रदेश में बिजली संकट के बीच ऊर्जा मंत्री सड़कों पर घुमा रहे हैं भैंस, वीडियो सामने आने के बाद हैरत में लोग


    इस समय मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में बिजली का भारी किल्लत (electricity shortage) है. कोयले की कमी के कारण ये समस्या पैदा हुई है. वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradhuman Singh Tomar) की एक वीडियो फिलहाल सोशल मीडिया (Pradhuman Singh Tomar video viral) पर जमकर वायरल हो रही है. इस वीडियो में ऊर्जा मंत्री सड़क पर भैंस की रस्सी पकड़कर उसे ले जाते हुए नजर आ रहे हैं. ये वीडियो रविवार रात का बताया जा रहा है. इस दिन ऊर्जा मंत्री तोमर ग्वालियर लौटे हैं. उन्होंने सोमवार सुबह बहोड़ापुर में विद्युत केन्द्र का निरीक्षण भी किया, लेकिन उनका सड़कों पर भैंस ले जाना सबसे ज्यादा चर्चा में है. हालांकि अभी तक भी इस मामले में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का पक्ष नहीं आया है.

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है ऊर्जा मंत्री का ये वीडियो केवल 30 सेकेंड का है. इस वीडियो में मंत्री तोमर ने एक भैंस की रस्सी अपने हाथ में पकड़ी हुई हैं. और वो सड़क पर अंधेरे में ट्रैफिक को हटाते हुए जा रहे हैं. उनकी सेवा में तैनात रहने वाला पुलिस बल उनके पीछे-पीछे जा रहा है. सड़क पर निकलते समय वह हंसी ठिठौली भी करते जा रहे हैं.

    कभी सीवर तो कभी ट्रांसफार्मर पर चढ़ जाते हैं तोमर

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अपने अलग अंदाज के लिए जाने जाते हैं. वो कोई ना कोई काम ऐसा कर ही देते हैं जिससे वो सोशल मीडिया पर चर्चाओं में आ जाते हैं. इससे पहले सीवर में उतरकर सफाई करने. कभी बिजली के ट्रांसफार्मर पर चढ़कर सफाई करने, शमशान घाट में श्रमदान करने के साथ-साथ जमीन पर बैठकर लोगों की शिकायत सुनने के उनके अंदाज के चलते वो हमेशा ही सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं.

    प्रदेश में बढ़ रहा है बिजली संकट

    पावर प्लांटों में कोयले के देशव्यापी संकट का असर मध्यप्रदेश में भी दिखने लगा है. प्रदेश में दो दिन पहले तक की यह स्थिति थी कि सिर्फ 592 हजार टन कोयला बचा है. खरगोन में कोयला पूरी तरह समाप्त हो चुका है. गाडरवाड़ा में भी सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है. इससे प्रदेश में बिजली संकट पैदा होगा. इसके बावजूद, ऊर्जा मंत्री का दावा है कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं होने दिया जाएगा.

    मध्यप्रदेश जनरेशन कंपनी के सबसे बड़े श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में दो दिन का कोयला बचा है. प्रदेश में बिजली की डिमांड 10 हजार मेगावॉट तक पहुंच रही है. इसकी तुलना में प्रदेश में थर्मल, जल, सोलर और विंड से महज 3900 मेगावॉट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है. शेष बिजली सेंट्रल पावर से ली जा रही है.

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