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    100 करोड़ वैक्सीनेशन बना बूस्टर डोज, यूं बदलती चली गई इकोनॉमी की तस्वीर


    देश के लिए आज यानी 21 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक है। दुनिया के तमाम बड़े देश को पछाड़ते हुए भारत ने कोरोना वैक्सीनेशन के 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया है। इसी साल 16 जनवरी से शुरू हुए वैक्सीनेशन की इस रफ्तार ने इकोनॉमी को भी गति दी है।

    कैसे मिल रही रफ्तार: कोरोना की पहली और दूसरी लहर की वजह से ट्रैक से उतर चुकी देश की इकोनॉमी अब एक बार फिर पटरी पर लौट रही है। जनजीवन सामान्य होता जा रहा है तो हॉस्पिटैलिटी, ऑटो समेत अन्य इंडस्ट्री से लेकर छोटे और बड़े मार्केट भी पहले जैसी स्थिति में लौट रहे हैं। रेलवे की पैसेंजर्स ट्रेने हों या एयरलाइन की सेवाएं, कुछ शर्तों के साथ ये भी अब पहले जैसी रफ्तार पकड़ने लगी है। 

    कोरोना के मामले कम होने और वैक्सीनेशन की तेज गति से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। यही वजह है कि शेयर बाजार भी अपने ऑल टाइम हाई पर चल रहा है। सेंसेक्स ने 62 हजार अंक को पार कर लिया है तो निफटी भी 18 हजारी बन गया है। जीडीपी, जीएसटी कलेक्शन, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ, कोर सेक्टर के तमाम आंकड़े ये बता रहे हैं कि इकोनॉमी कोरोना काल के बुरे दौर से बाहर निकल रही है।

    क्या कहते हैं आंकड़े: सितंबर 2021 के महीने में ग्रॉस जीएसटी रेवेन्यु कलेक्शन 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपए पर रहा। लगातार तीसरा महीना है जब कलेक्शन ने 1 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार किया है। ये कलेक्शन पिछले साल के इसी महीने में जीएसटी राजस्व से 23 फीसदी अधिक है। वहीं, अगस्त महीने में देश के औद्योगिक उत्पादन (IIP) में अगस्त में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक साल पहले यानी अगस्त 2020 में औद्योगिक उत्पादन 7.1 प्रतिशत घटा था।

    इसके अलावा अगस्त 2021 में आठ बुनियादी क्षेत्रों के उत्पादन में 11.6 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली। ये लगातार तीसरा महीना था, जब आठ बुनियादी क्षेत्रों में ग्रोथ आई थी। आठ बुनियादी उद्योगों में कोयला, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर्स, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी शामिल हैं। देश के औद्योगिक उत्पादन में ये करीब 40.27 फीसदी हिस्सेदार हैं।

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